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पूर्वोत्तर मानसून के आगमन के दौरान भारी बारिश की घटनाओं में तीव्र वृद्धि: अध्ययन

भारत मौसम विज्ञान विभाग के वरिष्ठ मौसम विज्ञानियों द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, 2011-2020 के दौरान उत्तर-पूर्वी मानसून के आगमन के चरण में वर्षा में तीव्र वृद्धि हुई है और मानसून के आगमन की अवधि के दौरान भारी वर्षा की घटनाओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
इस अध्ययन के लिए, दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश और उत्तर, मध्य और दक्षिण तटीय तमिलनाडु के बीच स्थित 16 तटीय स्टेशनों का चयन किया गया। चयनित मौसम स्टेशनों में नेल्लोर, सुलुरपेट, चेन्नई, नुंगमबक्कम, नागपट्टिनम और कन्याकुमारी शामिल थे।
अध्ययन में पाया गया कि 2011-2020 के बीच अक्टूबर में मानसून के आगमन पर दैनिक वर्षा में 10 मिमी से 33 मिमी तक की वृद्धि हुई थी। पिछले दशकों में इस अवधि के दौरान दैनिक वर्षा आमतौर पर 1 मिमी से 4 मिमी के बीच होती थी।
इस क्षेत्र में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की आवृत्ति पर किए गए विश्लेषण में यह पता चला है कि पूरे उत्तरपूर्वी मानसून के दौरान एक दशक में 16 मौसम स्टेशनों पर 429 दिन भारी वर्षा वाले रहे हैं।
अध्ययन के लेखकों में से एक, श्री राज ने बताया कि मानसून के आरंभ के बाद पहले सप्ताह में 91 दिनों तक भारी वर्षा हुई। मानसून के आरंभ के दौरान तटीय क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना, आरंभ से पहले की तुलना में 19 गुना अधिक बढ़ जाती है। हालांकि, मानसून की वापसी के बाद ऐसी भारी वर्षा की घटनाएं दुर्लभ हो जाती हैं।

अध्ययन में मानसून के आरंभ और समाप्ति की तिथियों को महत्वपूर्ण बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इस दशक में मानसून के आरंभ की औसत तिथि 23 अक्टूबर थी, जबकि समाप्ति की औसत तिथि 31 दिसंबर थी। ये तिथियां दीर्घकालिक औसत तिथियों से क्रमशः तीन और चार दिन बाद थीं।
दक्षिण तटीय तमिलनाडु में मानसून 5 जनवरी तक लंबे समय तक बना रहा।
इस अध्ययन में दशक के दौरान वर्षा की शुरुआत और समाप्ति के बाद वर्षा में हुई तीव्र वृद्धि और कमी को दर्शाने के लिए सुपरइम्पोज्ड इपोक तकनीक का उपयोग किया गया था। यह अध्ययन पुणे स्थित भारतीय जल विज्ञान विभाग (आईएमडी) के राष्ट्रीय डेटा सेंटर से प्राप्त सितंबर से फरवरी के बीच के दैनिक वर्षा आंकड़ों पर आधारित था।
श्री राज ने बताया कि यह अध्ययन उन पूर्व अध्ययनों की अगली कड़ी है जिनका उद्देश्य 1871 से लेकर 140 वर्षों की अवधि के लिए मानसून के आगमन और समाप्ति की तिथियों पर ऐतिहासिक डेटा जुटाना था। चेन्नई जैसे शहरों में हाल के वर्षों में भारी वर्षा के कई रिकॉर्ड टूटे हैं और पिछले कुछ दशकों में शहर की औसत वार्षिक वर्षा में वृद्धि हुई है।

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पोस्ट करने का समय: 10 अक्टूबर 2024