1. तकनीकी पृष्ठभूमि: एकीकृत जल विज्ञान रडार प्रणाली
"थ्री-इन-वन हाइड्रोलॉजिकल रडार सिस्टम" में आमतौर पर निम्नलिखित कार्य शामिल होते हैं:
- सतही जल निगरानी (खुले चैनल/नदियाँ): रडार-आधारित सेंसरों का उपयोग करके प्रवाह वेग और जल स्तर का वास्तविक समय में मापन।
- भूमिगत पाइपलाइन निगरानी: ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) या ध्वनिक सेंसर का उपयोग करके रिसाव, अवरोध और भूजल स्तर का पता लगाना।
- बांध सुरक्षा निगरानी: रडार इंटरफेरोमेट्री (इनएसएआर) या जमीनी रडार के माध्यम से बांध विस्थापन और रिसाव दबाव की निगरानी करना।
इंडोनेशिया जैसे उष्णकटिबंधीय, बाढ़-प्रवण देशों में, यह प्रणाली बाढ़ पूर्वानुमान, जल संसाधन प्रबंधन और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को बढ़ाती है।
2. इंडोनेशिया में वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोग
मामला 1: जकार्ता बाढ़ निगरानी प्रणाली
- पृष्ठभूमि: नदियों में पानी के उफान (जैसे कि सिलिवुंग नदी) और पुरानी जल निकासी प्रणालियों के कारण जकार्ता में अक्सर बाढ़ आती है।
- लागू की गई तकनीक:
- खुले चैनल: नदियों के किनारे स्थापित रडार फ्लो मीटर बाढ़ की चेतावनी के लिए वास्तविक समय का डेटा प्रदान करते हैं।
- भूमिगत पाइपलाइनें: जीपीआर पाइपों में होने वाली क्षति का पता लगाता है, जबकि एआई रुकावट के जोखिमों की भविष्यवाणी करता है।
- परिणाम: 2024 के मानसून सीजन में बाढ़ की प्रारंभिक चेतावनी का समय 3 घंटे तक बेहतर हुआ, जिससे आपातकालीन प्रतिक्रिया की दक्षता में 40% की वृद्धि हुई।
मामला 2: जतिलुहुर बांध प्रबंधन (पश्चिम जावा)
- पृष्ठभूमि: सिंचाई, जलविद्युत और बाढ़ नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण बांध।
- लागू की गई तकनीक:
- बांध की निगरानी: इनसार (InSAR) मिलीमीटर स्तर के विरूपणों का पता लगाता है; रिसाव रडार असामान्य जल प्रवाह की पहचान करता है।
- अनुप्रवाह समन्वय: रडार-आधारित जलस्तर डेटा स्वचालित रूप से बांध के जल निकासी फाटकों को समायोजित करता है।
- परिणाम: 2023 की बाढ़ के मौसम के दौरान बाढ़ से प्रभावित कृषि भूमि में 30% की कमी आई।
केस 3: सुरबाया स्मार्ट ड्रेनेज प्रोजेक्ट
- चुनौती: शहरी क्षेत्रों में भीषण बाढ़ और खारे पानी का घुसपैठ।
- समाधान:
- एकीकृत रडार प्रणाली: सेंसर जल निकासी चैनलों और भूमिगत पाइपों में प्रवाह और तलछट संचय की निगरानी करते हैं।
- डेटा विज़ुअलाइज़ेशन: जीआईएस-आधारित डैशबोर्ड पंप स्टेशन संचालन को अनुकूलित करने में मदद करते हैं।
3. लाभ और चुनौतियाँ
लाभ:
✅ वास्तविक समय की निगरानी: अचानक होने वाली जलवैज्ञानिक घटनाओं के लिए उच्च आवृत्ति रडार अपडेट (मिनट-स्तर पर)।
✅ बिना संपर्क के मापन: यह कीचड़ वाले या वनस्पति से ढके वातावरण में भी काम करता है।
✅ बहु-स्तरीय कवरेज: सतह से उपसतह तक निर्बाध निगरानी।
चुनौतियाँ:
⚠️ उच्च लागत: उन्नत रडार प्रणालियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी की आवश्यकता होती है।
⚠️ डेटा एकीकरण: इसके लिए विभिन्न एजेंसियों (जल, नगरपालिका, आपदा प्रबंधन) के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है।
कृपया होंडे टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड से संपर्क करें।
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पोस्ट करने का समय: 16 जुलाई 2025
